बच्चे स्कूल नहीं आते तो शिक्षक जिम्मेदार नहीं

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प्रारंभिक विद्यालयों का निरीक्षण जीविका दीदी से कराने के सरकार के आदेश को बताया असंवैधानिक

पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा प्रारंभिक विद्यालयों का निरीक्षण जीविका दीदी से कराने के आदेश को असंवैधानिक बताया है। साथ ही विद्यालयों बच्चों की कम उपस्थिति के लिए शिक्षकों को जिम्मेवार ठहराने को भी गैरकानूनी करार दिया है। यह फैसला हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस राजेन्द्र मेनन और जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष वंशीधर ब्रजवासी द्वारा दायर की गयी याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। दरअसल राज्य सरकार ने 3 अगस्त, 2016 को जीविका दीदी को विद्यालय का निरीक्षण करने का आदेश दिया था। इसके विरोध में वंशीधर व्रजवासी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर थी। संघ ने जीविका दीदी से विद्यालयों का निरीक्षण कराने के सरकार के आदेश को चुनौती दी थी। संघ की ओर से दायर याचिका में कहा कि जीविका एक गैर सरकारी संस्था है जिसमें अपने रोजगार और आजीविका के लिए महिलाएं जुड़ती हैं। इनमें अधिकतर महिलाएं कम पढ़ी-लिखी अथवा निरक्षर हैं, इन्हें शिक्षा की कोई समझ नहीं है ऐसी महिलाओं से विद्यालयों का निरीक्षण कराने से शिक्षकों का अपमान होगा और उनके द्वारा निरीक्षण के दौरान शिक्षकों पर अनावश्यक दवाव बनाकर भयादोहन किया जाता है।

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पटना हाईकोर्ट ने परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ की याचिका पर सुनवाई करने के बाद दिया आदेश

वहीं, कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि शिक्षकों का कार्य पढ़ना है न कि विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति कम होने पर उसके अभिभावक से मिलकर शतप्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित कराने की।

सूबे की शिक्षा व्यवस्था में मील का पत्थर साबित होगा कोर्ट का यह फैसला : संघ इस वक्त संघ के अध्यक्ष श्री व्रजवासी एवं महासचिव आनंद कुमार मिश्रा ने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय का फैसला बिहार की शिक्षा व्यवस्था में मील का पत्थर सावित होगा। अदालत ने स्पष्ट कहा कि शिक्षकों की जवाबदेही बच्चों के अभिभावकों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क स्थापित करने का नहीं है। इसके लिए राज्य सरकार विद्यालयों में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए। ऐसे उपकरण की व्यवस्था करे जिसके माध्यम से अभिभावकों को बच्चों से संबंधित सूचनाएं पहुंचायी जा सके। वहीं, कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि विद्यालयों में छात्रों की कम उपस्थिति होने पर शिक्षकों को सजा देना गैरकानूनी व अव्यावहारिक है। शिक्षक नेताओं ने कहा कि आए दिन शिक्षा विभाग के पदाधिकारी स्कूलों का निरीक्षण कर बच्चों की कम उपस्थिति पाए जाने पर शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगते हैं। इसकी आड़ में शिक्षकों का भयादोहन किया जाता है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद अव शिक्षक पठनपाठन का कार्य सुनिश्चित कर सकेंगे।

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