वैद्युत आवेश किसे कहते हैं | वैद्युत आवेश के मूल गुण | Conductor-Insulator #Electric_Charge | Types

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 वैद्युत आवेश किसे कहते हैं | वैद्युत आवेश के मूल गुण | Conductor-Insulator #Electric_Charge | Types

आज के पाठ में हम सीखेंगे

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Electric Charge


वैद्युत आवेश (Electric charge)

वैद्युत आवेश (Electric charge)  1

आवेश के प्रकार (Types of Charge).. 1

चालक (conductor).. 2

विदयुतरोधी (Insulator)2

अर्धचालक (semiconductor)3

वैद्युत आवेश के मूल गुण (Basic properties of electrical charge)3

(i) आवेश़ों की योज्यता.. 3

(ii) आवेश का संरक्षण (Charge protection) 3

(iii) वैद्युत आवेश का क्वांटमीकरण (Quantization of electrical charge) 4

आवेश का गणना (Calculation of Charge)4

 

 

 

वैद्युत आवेश (Electric charge)

वस्तुओं के ऐसे युगल जिसे परस्पर रगडे जाने पर वे भूसे के तीनको, कागज़ के छोटे टुकड़ों, सरकंडे की गोजलय़ों आदि छोटी वस्तुओं को आकर्षित कर लेते हैं। वस्तुओं पर होने वाले ऐसे प्रभाव को वैद्युत आवेश कहते हैं।

“Such pairs of objects, when rubbed together, attract small objects like straw, small pieces of paper, reed bullets etc. Such effect on objects is called electrical charge.”

  E  सफ़ेद कागज़ की लम्बी पतली पत्तियां काटकर उसपर धीरे से इस्तरी कर देने से यह पत्तियां परदे की ओर आकर्षित होती है

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  E  ऊन अथवा रेशम के कपडे से रगडी हुई दो कांच की छड़ों को जब एक दूसरे के निकट लाते है तो वे एक दूसरे को प्रर्तकर्षित करते है

  E  रगडे जाने वाले ऊन अथवा रेशम के कपडा भी परस्पर एक दुसरे को प्रर्तकर्षित करते है

  E  कांच के छड से स्पर्श की हुई सरकंडे की गोली दूसरे प्लास्टिक के छड से स्पर्श की हुई सरकंडे की गोली को आकर्षित करती है

आवेश के प्रकार (Types of Charge)

वैद्युत आवेश सामान्यतः एक राशी होती है जो मुख्यतः दो प्रकार के होते है

a सजातिय आवेश

b विजतिय आवेश

सजातिय आवेश एक दुसरे को आकर्षित करते है

विजतिय आवेश एक दूसरे को प्रर्तकर्षित करते है

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जब कांच की छड को रेशम से रगडते है तो छड एक प्रकार का आवेश अर्जित करता है तथा रेशम दूसरे प्रकार का आवेश अर्जित करता है यह विजतीय आवेश एक दूसरे के प्रभाव को निष्फल कर देते है इसी जलए अमेरिकी वैज्ञार्नक बेंजामिन फ्रैंकजलन ने आवेश़ों को धनात्मक तथा ऋणात्मक कहा। हम जानते है की गणित की अवधारणा में यदि किसी धनात्मक संख्या को उसी मन के ऋणात्मक संख्या में जोड़ते है तो योगफल शून्य हो जाता है

चालक (conductor)

जिस पदार्थ से होकर वैद्युत आवेश का प्रवाह होता है उसे चालक कहते है इन पदार्थों में वैद्युत आवेश (इलेक्ट्रान) परिपथ के भीतर गर्त करने के जलए स्वतन्त्र होते है।

“The substance through which electrical current flows is called conductor.”

जैसे = धातुएं , मानव शरीर, तथा जन्तु शरीर , पृथ्वी

विदयुतरोधी (Insulator)

जिस पदार्थ से होकर वैद्युत का प्रवाह नहीं होता है उसे वैद्युत रोधी कहते है इन पिाथों में वैद्युत आवेश (इलेक्ट्रान) परिपथ के भीतर गर्त करने के लिए स्वतन्त्र नहीं होते है।

“The material that does not flow through it is called an insulator.”

जैसे = कांच , प्लास्टिक , नायलॉन , लकडी आदि

अर्धचालक (semiconductor)

जिस पदार्थ से होकर वैद्युत का प्रवाह अवरोध के साथ होता है उसे अर्धचालक कहते है इस अवरोध का पररमाण चालक़ों तथा वैद्युत रोधियों के मध्यवती होता है।

“The material through which the current flows along the barrier is called a semiconductor.”

जैसे  आसेर्नक, बोरॉन , कार्बन आदि

वैद्युत आवेश के मूल गुण (Basic properties of electrical charge)

हम जानते है की धनावेश तथा ऋणावेश में एक दूसरे के प्रभाव को नष्ट करने की प्रवृति होती है इसके अतिरिक्त भी वैद्युत आवेश के कई गुण होते है।

(i) आवेश़ों की योज्यता

आवेश द्रव्मान की भांति आदिश राशी है यदि किसी निकाय में दो बिंदु आवेश q1 तथा q2 है तो निकाय का कुल आवेश q1 तथा q2 का बीजगणितीय  योग होगा।

उअदह्रण

किसी निकाय में किसी यादृच्छिक मात्रक में मापे गए पााँच आवेश +1, +2, –3, +4 तथा -5 हैं, तब उसी मात्राक में र्नकाय का कुल आवेश होगा

(+1) + (+2) + (-3) + (+4) + (-5) = -1

 

(ii) आवेश का संरक्षण (Charge protection)

जब वस्तुएँ रगडने पर आवेशित होती हैं तो एक वास्तु से दूसरे में इलेक्ट्रान का स्तानांतरण होता है, कोई नया आवेश उत्पन्न नहीं होता है, और न ही आवेश नष्ट होता है। वैद्युत आवेशयुक्त कण़ों को दृत्तष्ट में लाएाँ तो हमें आवेश के संरक्षण की धारणा समझ में आएगी। जब हम दो वस्तुओं को परस्पर रगडते हैं तो एक वास्तु जितना आवेश प्राप्त करती है, दूसरी वस्तु उतना आवेश खोती है।

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यधपि किसी प्रकिया में आवेशवाही कण उत्पन्न अथवा नष्ट किए जा सकते हैं, परंतु किसी वियुक्त निकाय के कुल आवेश को उत्पन्न करना अथवा नष्ट करना संभव नहीं है। कभी-कभी प्रकृति आवेजशत कण उत्पन्न करती है: कोई न्यूरान एक प्रोटान तथा एक इलेक्ट्रान में रूपांतररत हो जाता है। इस प्रकार उत्पन्न प्रोटान तथा इलेक्ट्रान पर, अंत में समान एवं र्विातीय आवेश उत्पन्न होते हैं तथा इस रचना से पूवश और रचना के पश्चात का कुल आवेश शून्य रहता है।

 

(iii) वैद्युत आवेश का क्वांटमीकरण (Quantization of electrical charge)

सभी मुक्त आवेश परिमाण में आवेश की मूल इकाई, जिसे e द्वारा दर्शाया जाता है, के पूणाांक़ों की गुणि हैं। इस प्रकार, किसी वस्तु के आवेश q को सिैव इस प्रकार दर्शाया जाता है

n = qe

यहााँ n कोई धनात्मक अथवा ऋणात्मक पूणाांक है। आवेश की यह मूल इकाई अथवा प्रोटॉन

के आवेश का पररमाण है। पररपाटी के अनुसार, एलेक्ट्रन के आवेश को ऋणात्मक मानते हैं। इसीजलए ककसी इलेक्ट्रान पर आवेश –e तथा प्रोटान पर आवेश +e द्वारा व्यक्त करते हैं।

वैद्युत आवेश सिैव e का पूणाांक गुणि होता है। इस तथ्य को आवेश का क्वानटमीकरण कहते

हैं।

 

आवेश का गणना (Calculation of Charge)

मात्राक़ों की अंतराशष्ट्रीय प्रणाली (SI) में आवेश का मात्राक कूलॉम है, जिसका प्रतीक C है। एक कूलॉम को वैद्युतधारा के मात्रक के पदों में परिभारशित किया जाता है। एक कुलाम वह आवेश है जिसे किसी तार में 1 A (एम्पीयर ) धारा 1 सेकंड तक प्रवाहित करता है

e = 1.602192 × 10–19 C

-1C = 6 X 1018 e

1 mC (त्तमलीकूलॉम) = 10-3 C

1 μC (माइिोकूलॉम) = 10-6 C

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